Contactor

What is contactor in Hindi. कॉन्टैक्टर क्या है।

Contactor. कान्टैक्टर एक इलेक्ट्रिकल स्विच होता है। जिसे हम इलेक्ट्रिकल सप्लाई देकर बंद या स्टार्ट कर सकते है।

जैसे- आपने आपके घर के स्विच बोर्ड में लगे स्विच देखे होंगे| वो मेकेनिकल कन्ट्रोल स्विच होते है, मतलब उस स्विच को ऑन या ऑफ करने के लिए हमे उनके पास जाना ही पड़ेगा।

Contactor and Switch

कान्टैक्टर भी एक स्विच ही होता है, पर यह इलेक्ट्रिकल स्विच होता है। जिसको हम दूर से ही इलेक्ट्रिकल सप्लाई देकर बन्द या स्टार्ट कर सकते है।

Contactor type. कॉन्टैक्टर के प्रकार

कॉन्टैक्टरदो प्रकार के होते हैं।

  1. Manual contactor
  2. Magnetic contactor

Manual Contactor. इसे मैन्युअल ऑपरेट किया जाता है। संपर्ककर्ता चाकू ब्लेड स्विच पर एक प्रतिस्थापन और सुधार था। हालाँकि, इसमें अभी भी मैनुअल ऑपरेशन की सुविधा है। अन्य प्रमुख विशेषताएं हैं

डबल ब्रेक कॉन्टैक्ट्स, जो एक साथ दो जगहों पर सर्किट को खोल सकते हैं, छोटे स्थानों में अधिक करंट प्रदान करते हैं।

आंतरिक भागों की रक्षा करने वाली उचित रूप से संलग्न इकाई

सुरक्षित संचालन

छोटे आकार का

Magnetic Contactor. यह नवीनतम संपर्ककर्ता डिज़ाइन है और उन सभी में सबसे उन्नत है। इसकी विशेषताओं के कारण यह आमतौर पर औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है:

यह स्वचालित रूप से काम करता है

सबसे सुरक्षित संचालन प्रदान करता है

सर्किट को खोलने और बंद करने के लिए कम से कम कंट्रोल करंट का उपयोग करता है।

Contactor Terminal कॉन्टैक्टर टर्मिनल क्या होते है?

कान्टैक्टर में दो तरह के टर्मिनल होते है।

  1. पावर टर्मिनल (Power Terminal)
  2. कंट्रोल टर्मिनल (Control Terminal)

इसके अलावा कान्टैक्टर में कॉइल टर्मिनल (Coil Terminal) भी होता है।

कान्टैक्टर कॉइल टर्मिनल- यह काफी जरूरी पॉइन्ट होता है।  इसकी सहायता से ही हम कॉन्टैक्टर को बंद चालू करते है।

सभी प्रकार के कान्टैक्टर में A1 और A2 टर्मिनल जरूर होते है, यह टर्मिनल कॉन्टैक्टर को स्टार्ट कराने के लिए उपयोग किये जाते है।

सभी कान्टैक्टर पर लिखा होता है, की उस कान्टैक्टर का कॉइल वोल्टेज कितना है।

जैसे- अगर किसी कॉन्टैक्टर पर लिखा है (A1 A2- 240AC)

इसका मतलब यह है, हमको इसके A1 A2 पॉइन्ट पर 240 वोल्टेज सप्लाई देनी है।और a1 a2 पर 240 वोल्टेज की सप्लाई देते ही हमारा कॉन्टैक्टर स्टार्ट हो जाएगा।

Power Terminal पावर और कंट्रोल टर्मिनल क्या है?

Power Terminal. जैसे मैने आपको बताया की कान्टैक्टर का उपयोग हम स्विच की तरह काम में लेते है। पर अगर हमको कभी किसी मोटर को चलाना है, तब हमे ज्यादा करंट झेल पाने वाले कॉन्टैक्ट की जरूरत पड़ेगी। 

क्योंकि अगर हम कमजोर पॉइन्ट पर ज्यादा करंट जोड़ देंगे तो वह पॉइन्ट पिघल जाता है।

इस वजह से टर्मिनल को दो भागो में बाटा जाता है।

पावर टर्मिनल(Power Terminal)– इसमे हम ज्यादा करंट गुजरने वाले वायर को जोड़ते है।

Power Terminal

जिस वायर में 2-3 एम्पेयर से ज्यादा करंट गुजरता है, उस वायर को हम पावर टर्मिनल से स्विच कराते है मतलब बन्द चालू कराते है।

जैसे- मोटर के सप्लाई वायर।

कंट्रोल टर्मिनल(Control Terminal)– इनमे हम कम करंट वाले वायर को स्विच कराते है।

Control Terminal

जैसे- अगर हम चाहते है की हमारी मोटर जब स्टार्ट हो तब एक हमारी कोई इंडिकेशन लाइट चल जाए। जिसकी मदद से हमे पता चल जाए की, मोटर शुरू हो गयी है। तो इस जगह पर हम कंट्रोल के पॉइन्ट का उपयोग करते है। क्योंकि इंडिकेशन लैंप ज्यादा करंट नही लेते है।

NO और NC पॉइन्ट क्या होते है?

अगर आप इलेक्ट्रीकल में पढ़ाई या फिर जॉब कर रहे है तो आपको no nc समझना काफी जरूरी है। वैसे दोस्तो NO NC काफी आसान है।

NO & NC

जैसे दोस्तो कोई दो पॉइन्ट है अगर वह दोनों आपस में जुड़े हुए नही है इसका मतलब वह ओपन पॉइन्ट है। और अगर वह दोनो आपस में जुड़े हुए है, इसका मतलब की यह दोनो एक दूसरे के साथ close है।

NO का पूरा नाम- नॉर्मली ओपन (Normally Open) 

इसका मतलब यह दोनो पॉइन्ट नार्मल कंडीशन में एक दूसरे से दूर-दूर रहेंगे। मतलब अगर हमने NO के एक पॉइंट में इलेक्ट्रीकल सप्लाई दी तो वह हमको दूसरे पॉइन्ट पर नही मिलेगी।

NO

परन्तु अगर हमने कान्टैक्टर के A1 A2 पॉइन्ट में सप्लाई देकर कॉन्टैक्टर को स्टार्ट कर दिया। तब यह नार्मल कंडीशन नही होती है। मतलब कॉन्टैक्टर स्टार्ट हो जाने के बाद कंडीशन नार्मल नही रहेगी और उस समय हमारे NO के एक कांटेक्ट की सप्लाई दूसरे कन्टेक्ट में मिल जाएगी।

NC क्या होता है(What is NC Contact)

NC का पूरा नाम- नॉर्मली क्लोज (Normally Close)

मतलब जब तब हमारा कान्टैक्टर नार्मल कंडीशन में है तब तक हमारे दोनो कांटेक्ट आपस में जुड़े होंगे।

NC

जैसे- अगर हमने NC के एक पॉइन्ट पर इलेक्ट्रिक सप्लाई दी तो वह हमको दूसरे पॉइन्ट पर मिलती रहेगी। परन्तु जब हम कॉन्टैक्टर को स्टार्ट करेगे तब हमारे NC कांटेक्ट जो एक दूसरे से जुड़े होते है वह दूर दूर हो जायेगे।

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