Contactor

what is contactor type in Hindi

Contactor type. कॉन्टैक्टर कितने प्रकार के होते हैं। आज इस आर्टिकल में जानेंगे।

कॉन्टैक्टर दो प्रकार के होते हैं।

1. Manual contactor मैन्युअल कॉन्टैक्टर

2. Magnetic contactor मैग्नेटिक कॉन्टैक्टर

मैनुअल कॉन्टैक्टर Manual contactor

यह कॉन्टैक्टर चाकू ब्लेड स्विच पर एक प्रतिस्थापन और सुधार था। हालाँकि, इसमें अभी भी मैनुअल ऑपरेशन की सुविधा है। अन्य प्रमुख विशेषताएं हैं

डबल ब्रेक कॉन्टैक्ट्स, जो एक साथ दो जगहों पर सर्किट को खोल सकते हैं, छोटे स्थानों में अधिक करंट प्रदान करते हैं।

आंतरिक भागों की रक्षा करने वाली उचित रूप से संलग्न इकाई

सुरक्षित संचालन

छोटे आकार का

चुंबकीय मेलक Magnetic contactor

यह नवीनतम संपर्ककर्ता डिज़ाइन है और उन सभी में सबसे उन्नत है। इसकी विशेषताओं के कारण यह आमतौर पर औद्योगिक अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है:

यह स्वचालित रूप से काम करता है

सबसे सुरक्षित संचालन प्रदान करता है

सर्किट को खोलने और बंद करने के लिए कम से कम कंट्रोल करंट का उपयोग करता है।

Contactor टर्मिनल क्या होते है?

कान्टैक्टर में दो तरह के टर्मिनल होते है।

  1. पावर टर्मिनल(Power Terminal)
  2. कंट्रोल टर्मिनल(Control Terminal)

इसके अलावा कान्टैक्टर में कॉइल टर्मिनल (Coil Terminal) भी होता है।

कान्टैक्टर कॉइल टर्मिनल- यह काफी जरूरी पॉइन्ट होता है।  इसकी सहायता से ही हम कॉन्टैक्टर को बंद चालू करते है।

सभी प्रकार के कान्टैक्टर में A1 और A2 टर्मिनल जरूर होते है, यह टर्मिनल कॉन्टैक्टर को स्टार्ट कराने के लिए उपयोग किये जाते है।

सभी कान्टैक्टर पर लिखा होता है, की उस कान्टैक्टर का कॉइल वोल्टेज कितना है।

 Contactor 240V

जैसे- अगर किसी कॉन्टैक्टर पर लिखा है (A1 A2- 240AC)

इसका मतलब यह है, हमको इसके A1 A2 पॉइन्ट पर 240 वोल्टेज सप्लाई देनी है।और a1 a2 पर 240 वोल्टेज की सप्लाई देते ही हमारा कॉन्टैक्टर स्टार्ट हो जाएगा।

(Power Terminal) पावर और कंट्रोल टर्मिनल क्या है?

जैसे मैने आपको बताया की कान्टैक्टर का उपयोग हम स्विच की तरह काम में लेते है। पर अगर हमको कभी किसी मोटर को चलाना है, तब हमे ज्यादा करंट झेल पाने वाले कॉन्टैक्ट की जरूरत पड़ेगी। क्योंकि अगर हम कमजोर पॉइन्ट पर ज्यादा करंट जोड़ देंगे तो वह पॉइन्ट पिघल जाता है।

इस वजह से टर्मिनल को दो भागो में बाटा जाता है।

Power and Control Terminal पावर टर्मिनल और कंट्रोल टर्मिनल

पावर टर्मिनल(Power Terminal)– इसमे हम ज्यादा करंट गुजरने वाले वायर को जोड़ते है।

Power Terminal Contactor

जिस वायर में 2-3 एम्पेयर से ज्यादा करंट गुजरता है, उस वायर को हम पावर टर्मिनल से स्विच कराते है मतलब बन्द चालू कराते है।

जैसे- मोटर के सप्लाई वायर ज्यादा तर कॉन्टैक्टर मोटर और कॉन्टैक्टर पैनल और वर्क में लगाया जाता है।

कंट्रोल टर्मिनल(Control Terminal)  इनमे हम कम करंट वाले वायर को स्विच कराते है।

Contactor terminal

जैसे- अगर हम चाहते है की हमारी मोटर जब स्टार्ट हो तब एक हमारी कोई इंडिकेशन लाइट चल जाए। जिसकी मदद से हमे पता चल जाए की, मोटर शुरू हो गयी है। तो इस जगह पर हम कंट्रोल के पॉइन्ट का उपयोग करते है। क्योंकि इंडिकेशन लैंप ज्यादा करंट नही लेते है। इसका उपयोग कंट्रोल करने के लिए किया जाता है।

Contactor NO और NC पॉइन्ट क्या होते है?

अगर आप इलेक्ट्रीकल में पढ़ाई या फिर जॉब कर रहे है तो आपको no nc समझना काफी जरूरी है। वैसे दोस्तो NO NC काफी आसान है।

Contactor NO and NC

जैसे दोस्तो कोई दो पॉइन्ट है अगर वह दोनों आपस में जुड़े हुए नही है इसका मतलब वह ओपन पॉइन्ट है।

और अगर वह दोनो आपस में जुड़े हुए है, इसका मतलब की यह दोनो एक दूसरे के साथ close है।

NO क्या होता है।

NO का पूरा नाम- नॉर्मली ओपन (Normally Open) 

इसका मतलब यह दोनो पॉइन्ट नार्मल कंडीशन में एक दूसरे से दूर-दूर रहेंगे। मतलब अगर हमने NO के एक पॉइंट में इलेक्ट्रीकल सप्लाई दी तो वह हमको दूसरे पॉइन्ट पर नही मिलेगी।

Contactor NO

परन्तु अगर हमने कान्टैक्टर के A1 A2 पॉइन्ट में सप्लाई देकर कॉन्टैक्टर को स्टार्ट कर दिया। तब यह नार्मल कंडीशन नही होती है। मतलब कॉन्टैक्टर स्टार्ट हो जाने के बाद कंडीशन नार्मल नही रहेगी और उस समय हमारे NO के एक कांटेक्ट की सप्लाई दूसरे कन्टेक्ट में मिल जाएगी।

NC क्या होता है(What is NC Contact)

NC का पूरा नाम- नॉर्मली क्लोज (Normally Close)

मतलब जब तब हमारा कान्टैक्टर नार्मल कंडीशन में है तब तक हमारे दोनो कांटेक्ट आपस में जुड़े होंगे।

Contactor NC

जैसे- अगर हमने NC के एक पॉइन्ट पर इलेक्ट्रिक सप्लाई दी तो वह हमको दूसरे पॉइन्ट पर मिलती रहेगी।

परन्तु जब हम कॉन्टैक्टर को स्टार्ट करेगे तब हमारे NC कांटेक्ट जो एक दूसरे से जुड़े होते है।

वह दूर दूर हो जायेगे।

इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद कोई सवाल सुझाव है तो कमेन्ट बॉक्स में जरूर बताएं।

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